बिहार बोर्ड एग्जाम सेंटर पर चेकिंग प्रक्रिया: तीन स्तरों पर फ्रिस्किंग और सावधानियां
बोर्ड एग्जाम के सेंटर पर चेकिंग कैसे होती है? जब बोर्ड एग्जाम देने के लिए अब चाहे वो 10 का बोर्ड एग्जाम हो या 12 का बोर्ड एग्जाम हो। जब आप एग्जाम देने के लिए जाते हैं तो सेंटर पर तीन जगहों पर चेकिंग होती है। तीन बार चेकिंग होती है। फ्रिस्किंग होती है। हर एक बच्चे की तलाशी ली जाती है तीन स्पॉट पर। अब ये तीन जगहों में से एक स्पॉट तो ऐसा है ना कि अगर वहां पर किसी बच्चे के पास से अगर कोई आपत्तिजनक अगर कोई चीज पाई जाती है। आपत्तिजनक मतलब जिस पर एग्जामिनेशन में रोक है। अगर ऐसी कोई चीज पाई जाती है तो उस बच्चे को तुरंत एग्जाम से एक्सपेल्ड कर दिया जाता है। निष्कासित कर दिया जाता है। और उससे केवल उसी साल का केवल उस बच्चे का एग्जाम लॉस्ट नहीं होता। नुकसान नहीं होता बल्कि अगले दो साल के लिए भी बच्चे को बैठा दिया जाता है। एग्जाम देने पर उस पर रोक लगा दी जाती है। तो आखिर ये एग्जाम सेंटर के ये तीन सीक्रेट हैं कौन-कौन? सेंटर पर चेकिंग के ये तीन राज तीन सीक्रेट हैं कौन-कौन? मैं आपको बताने वाला हूं इस वीडियो में ताकि आप अपने मैट्रिक इंटर एग्जाम या फिर 10 12 के बोर्ड एग्जाम के लिए जब सेंटर पे जाएं तो इन बातों से सावधान रहें। और आप ये सावधान रहने के साथ-साथ इन चीजों से जो गलतियां होती हैं, जो नुकसान होते हैं, उससे बच भी सकें।
Bihar Board Exam Center Checking 2026: Overview
| फील्ड | विवरण |
|---|---|
| Name of Board | Bihar School Examination Board |
| Name of Article | बोर्ड एग्जाम सेंटर पर चेकिंग प्रक्रिया |
| Exam Year | 2026 |
| Checking Levels | तीन स्तरों पर (गेट, हॉल, फ्लाइंग स्क्वाड) |
| Prohibited Items | चिट, गाइड, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस आदि |
| Punishment for UFM | एक्सपेल और डिबार (वर्षों के लिए) |
| Official Website | biharboardonline.bihar.gov.in |
पहली चेकिंग: मेन गेट पर
देखिए सेंटर पर पहली जो चेकिंग होती है नंबर एक पॉइंट पर आता है जब सेंटर पर आप पहुंचते हैं और मेन गेट से सेंटर के अंदर एंट्री करते हैं तो वहां पर होती है सबसे पहले चेकिंग। अब देखिए इसमें क्या होता है ना कि सेंटर कहीं भी जब बनाया जाता है एग्ज़ाम का परीक्षा केंद्र जब बनाया जाता है तो सेंटर को सबसे पहले तो चारों तरफ से किया जाता है सुरक्षित सिक्योर। यानी अगर बाउंड्री नहीं है तो एक टेंपरेरी बाउंड्री बनाया जाएगा। अब चाहे वो बाउंड्री लकड़ी का ही क्यों ना हो लेकिन उस पूरे कैंपस को पहले सिक्योर किया जाता है और उसका एक मेन एंट्रेंस यानी एक मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाता है। तो जब उस मुख्य प्रवेश द्वार से आप उस सेंटर के अंदर जाने के लिए एंट्री करते हैं तो वहां पर होती है पहली चेकिंग। अब इस जगह पर चेक करने वाले उस सेंटर के जो है सीएस से सीएस के द्वारा नियुक्त कोई भी कर्मचारी हो सकते हैं। उस सेंटर के जो है ना अलग-अलग इनविजिलेटर हो सकते हैं, टीचर हो सकते हैं। साथ में कुछ पुलिस के जो है कर्मी हो सकते हैं। सुरक्षाकर्मी हो सकते हैं। ये सब मिलजुल के बच्चों का सेंटर के अंदर आ अंदर आते हुए फ्रिस्किंग करते हैं, चेकिंग करते हैं और इसमें क्या होता है ना कि बच्चों की पूरी तलाशी ली जाती है। पूरे बॉडी की तलाशें ली जाती है कि बच्चे ने अपने कपड़ों के अंदर कहीं कोई आपत्तिजनक चीज जो एग्जाम में रेस्ट्रिक्टेड है, वह कहीं अपने पास छुपाया हुआ तो नहीं ना है। हाथों, कलाइयों, बाहों, कमर, कमर के पीछे, आसपास का, कमर के आसपास का एरिया खास करके फिर नीचे अगर जूता पहने हुए हैं, तो जूता खुलवा करके। हालांकि कुछ-कुछ सेंटर एग्जाम सेंटर तो ऐसे भी होते हैं अधिकतर आजकल कि जहां पर जूता पहनकर जाना ही अलाउड नहीं होता है। लेकिन अगर अलाउ किया गया ठंडी की वजह से तो जूता खुलवा करके भी चेक किया जाता है। यानी पूरे शरीर की तलाशी ली जाती है और खास करके इस मौके पर जो तलाशी होती है वह कमर के आसपास ज्यादा सघन तलाशी ली जाती है। कलाइयां यानी पूरे हाथ को कलाइयों से लेकर के बिल्कुल बाहों तक और कमर से लेकर नीचे पैरों तक सब कुछ चेक किया जाता है। ठीक है? अब चेकिंग हो गई यहां पर। यहां पर अगर किसी के पास कोई आपत्तिजनक चीज मिलती है तो उतना नुकसान होने के चांसेस कम होते हैं। क्या होता है ना कि अगर मेन गेट पर ही कुछ चिट पुरजा मिल गया, कोई कागज का टुकड़ा मिल गया, प्रश्न पत्र या फिर कोई जो है गेस पेपर गाइड या किताब का टुकड़ा मिल गया तो वो बस उस वक्त क्या होता है ना कि उस चीज को निकाल कर फेंक करके आने के लिए कहा जाता है। तो वहां पर एक्सपेल्ड होने का डर कम से कम नहीं होता है। यह है कि डांट फटकार करके थोड़ा सा बच्चे को डरा करके और वह चीज निकलवा दी जाती है। बच्चे को अंदर जाने दिया जाता है। तो यह पहला स्टेप हुआ चेकिंग करने का। यहां पर पकड़ाने से एक्सपेल्ड होने का डर नहीं होता है।
दूसरी चेकिंग: क्लासरूम में इनविजिलेटर द्वारा
अब अब जब आप चले गए अंदर तो अंदर आपको मिलेगा क्या? तो अंदर जो अलग-अलग क्लासरूम बने हुए हैं। अलग-अलग क्लास रूम में अब आपको किस क्लास रूम में बैठना है? उसके लिए एक पूरा लिस्ट चिपका होता है कि हां भाई फला रोल कोड के रोल नंबर इतना से लेकर रोल नंबर इतना तक के बच्चों को इस रूम में बैठना है। रूम नंबर 2 3 4 5 10 20 कितना भी हो सकता है वो रूम नंबर आपको देख लेना है कि आपका रोल नंबर किस रूम में डाला गया है। अलॉट किया गया है। उस रूम में पहुंच गए। अपनी सीट पर बैठ गए। अब जब आप अपनी सीट पर बैठ गए और आपके अलावा उस रूम के अंदर और जो सारे बच्चे हैं वो भी आकर के अपनी सीट पर बैठ गए। और जब सारे सारे बच्चे बैठ जाते हैं तो उस रूम में जो इनविजिलेटर जो टीचर की ड्यूटी लगी होती है क्वेश्चन पेपर बांटने की आपका कॉपी बांटने की आपको अटेंडेंस शीट देने की जिनकी ड्यूटी होती है उनको फिर से चेक करने के लिए कहा जाता है क्योंकि टीचर से शिक्षकों से इनविजिलेटर से एक घोषणापत्र एक डिक्लेरेशन साइन करवाया जाता है कि हां भाई मैंने अपने क्लासरूम के अंदर अपने एग्जामिनेशन हॉल के अंदर बैठे हुए सारे बच्चों की फ्रिस्किंग कर ली, तलाशी ले ली है और किसी के पास कोई आपत्तिजनक चीज नहीं पाई गई तो जाहिर सी बात है कि जब वो ये लिख करके साइन करके दे रहे हैं तो फ्रिस्किंग तो करेंगे ही तो इसलिए वो भी तलाशी लेते हैं। वो भी चेक करते हैं अंदर बैठने के बाद वो भी चेक करते हैं और चेक करने के बाद जब वो संतुष्ट हो जाते हैं, सेटिस्फाई हो जाते हैं कि अब किसी के पास कुछ भी नहीं है तो वह डिक्लेरेशन साइन करके और सीएस के पास जमा कर देते हैं। अब यहां पर हम रूम के अंदर किसी तरह से कुछ छुपा कर लेकर के मेन गेट से लेकर के आने में सफल हो गए और अपने क्लास रूम के अंदर पहुंच गए और अगर वहां पर टीचर एग्जाम शुरू होने से पहले जो उन्होंने चेक किया उस वक्त अगर पकड़ा गए हम हमारे पास से कुछ आपत्तिजनक चीज निकल गई तो क्या होगा तो इस वक्त भी एक्सपेल्ड होने का डर थोड़ा कम होता है। देखिए एक्सपेल्ड हो सकते हैं। मैंने यह नहीं कहा कि एक्सपेल्ड नहीं हो सकते हैं। लेकिन हां एक्सपेल्ड होने का डर कम होता है। डर कहां होता है मैं आगे बताऊंगा। जहां पर पकड़ाए, तो फिर एक्सपेल्ड होना ही होना है, वह मैं आगे बताऊंगा। तो, यह अह अगर इस वक़्त भी पकड़ाते हैं आप, कुछ ऐसी आपत्तिजनक चीज़ मिलती है, तो वो आपसे छीन लिया जाता है और आपको डांट फटकार करके थोड़ा सा डरा धमका करके और बच्चे को एग्जाम देने दिया जाता है। ताकि बच्चे का जो है समय खराब ना हो। लेकिन ये डिपेंड करता है सेंटर पर। उस सेंटर और उस क्लासरूम के अंदर जो टीचर ड्यूटी में है उन पर डिपेंड करता है। वो चाहे तो आपको उस वक्त भी रेस्ट्रिक्टेड कर सकते हैं। आपको उस वक्त भी एग्जाम देने से रोक सकते हैं। लेकिन जनरली ऐसा नहीं किया जाता। तो ये दो स्टेप हो गए।
तीसरी चेकिंग: फ्लाइंग स्क्वाड (उड़न दस्ता) द्वारा
और तीसरा जो चेकिंग होता है तीसरी बार जो चेकिंग होती है वो कब होती है? तो वही सबसे खतरनाक है। सबसे खतरनाक और उसी वक्त बच करके रहना है। देखिए एग्जाम में क्या होता है ना कि जितने भी सेंटर बनाए जाते हैं चार पांच छह एग्जाम सेंटर पर एक उड़न दस्ता की नियुक्ति होती है। उड़न दस्ता मतलब फ्लाइंग स्क्वाड मतलब एक टीम बनाई जाती है। उस टीम के एक जो है मजिस्ट्रेट होते हैं और उस टीम के अंदर कुछ लोग जो हैं मेंबर होते हैं। चार पांच लोगों की एक टीम होती है जिसको फ्लाइंग स्क्वाड कहते हैं। उड़नदस्ता की टीम कहते हैं। और इनका काम होता है कि अगर पांच सेंटर का फ्लाइंग स्क्वाड उस टीम को बनाया गया तो वो टीम बारी-बारी से पांचों सेंटर पर विजिट करेगी और ये विजिट कब करते हैं? तो ये एग्जाम जब चलता रहता है। एग्जाम शुरू हो गया। एक घंटा बीत गया, डेढ़ घंटा बीत गया, 2 घंटा बीत गया। 3- 3 घंटे का जो भी एग्जाम है। अब एग्जाम का टाइम तो भाई अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग होता है। लेकिन 3:00 से लेकर 3 1/4 घंटा, 3 घंटा। ये जो एग्जाम का टाइम है ना, एग्जाम के बीच पहुंचते हैं ये लोग। और ये लोग जब पहुंचते हैं ना तो अचानक से पहुंचेंगे किसी भी सेंटर पर और अचानक से किसी भी क्लासरूम में पहुंच जाएंगे।
फ्लाइंग स्क्वाड आने पर सावधानियां
अब ऐसे केस में बच्चे कर देते हैं गलती। गलती कहां होती है? बॉडी लैंग्वेज में। अब जैसे आप खुद सोचिए पहले से जब वो टीम के लोग नहीं आए क्लास रूम में कोई नहीं है। नॉर्मल सब कुछ चल रहा है तो बच्चे का कलम भी चल रहा है। वो बच्चा लगातार अपने आंसर को लिख रहा है। पेपर वो लगातार लिख रहा है। लेकिन जैसे ही बाहर से फ्लाइंग स्क्वाड की टीम आती है किसीकिसी बच्चे की ये आदत होती है कि वो अपना कलम रोक लेते हैं। लिखना बंद कर देते हैं और उन लोगों को देखना शुरू कर देते हैं। ऐसे केस में उस टीचर को या उस फ्लाइंग स्क्वाड के जो मजिस्ट्रेट हैं या टीम के मेंबर हैं उनको यह शक होता है कि हमारे आने से पहले यह बच्चा लिख रहा था। इसका कलम चल रहा था। अब हमारे आने के बाद इसका कलम रुक क्यों गया? इसका मतलब साफ है कि यह कहीं ना कहीं नकल करके और या फिर कुछ चोरीचकारी करके और पेपर पे आंसर लिख रहा था। तो ऐसे केस में वो आपको खड़ा करवा सकते हैं और अगर आपको खड़ा करवा दिया तो फिर आपकी पूरी चेकिंग होगी और अगर उन्होंने खड़ा करवाया और उस वक्त चेकिंग हुई और उस वक्त अगर कुछ आपके पास से निकल गया ना तो फिर समझिए कि एक्सपेल्ड होना ही होना है। एक्सपेल्ड ना होने का सवाल ही नहीं उठता है। क्योंकि बीच एग्जाम में आपके पास से कोई आपत्तिजनक चीज मिली है। चाहे वो चिट चिट ऊर्जा हो, किताब का टुकड़ा हो, गेस पेपर गाइड पेपर का टुकड़ा हो या जो भी हो। अगर बीच एग्जाम भी मिल गया फ्लाइंग स्क्वाड वालों ने पकड़ लिया तो उनसे बचना मुश्किल हो जाता है। हालांकि अगर वो भी चाहें तो बच्चे को मौका दे सकते हैं लेकिन अक्सर नहीं देते हैं। ये आपको ध्यान रखना है। तो करना क्या है कि फ्लाइंग स्क्वाड वाले आए अगर बाहर की टीम आती है उड़न दस्ता की टीम तो उस वक्त आप जो भी लिख रहे हैं उसको लिखते रहें। कंटिन्यू करें। ये नहीं कि अपना पेन रोका लिखावट को बंद किया लिखना बंद करके और हमने उनको देखना शुरू कर दिया। ऐसे केस में ही बच्चे को खड़ा किया जाता है। ऐसा नहीं है। वो लोग आते हैं तो एक-एक बच्चे को खड़ा नहीं करवाते हैं। एक-एक बच्चे को खड़ा नहीं करवाएंगे। बस जिस पर शक होगा जिस पर थोड़ा सा भी डाउट होगा ना उस बच्चे को खड़ा करवाएंगे वो लोग और खड़ा करवा करके उसको चेक करना शुरू कर देते हैं और अगर चेक किया कुछ भी ना मिला तो कोई प्रॉब्लम नहीं है और अगर चेक किया कहीं से कुछ मिल गया अगर तब उस बच्चे के साथ बहुत समस्या है तो ये तीन स्टेप में चेकिंग होती है और इन तीनों जगहों पर आपको बड़े सावधान रहना और खास करके एग्जाम चल रहा हो फ्लाइंग स्क्वाड वाले आए हुए हों तो उस वक्त आपको जो आ रहा है जैसे आ रहा है अपने क्वेश्चन का आंसर लिखते रहिए पेन को ना रोकिए अपने बॉडी लैंग्वेज से ये सामने वाले को फील ना होने दीजिए, महसूस ना होने दीजिए कि हम कुछ गलत कर रहे हैं। आप पर शक होगा तो खड़े करवाए जाएंगे। और अगर आपके पास कुछ भी नहीं है, कोई भी आपत्तिजनक चीज नहीं है, आप अपने से अपना पेपर लिख रहे हैं तो फिर तो आपको वैसे भी डरने की जरूरत नहीं है। आप अपना पेन रोक करके भी देख रहे हैं तो भी खड़ा करवा के अगर चेक किया भी जाएगा। जब मेरे पास कुछ है ही नहीं, तो फिर डरने की क्या जरूरत है? और भी अगर कोई क्वेश्चन कोई डाउट आपका बच जाता है कमेंट में पूछ सकते हैं।
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